जमवाय माता मंदिर में स्थापित है, झुंझार बनकर लड़े करण सिंह खंगारोत का शिलालेख
*जमवाय माता मंदिर में स्थापित है, झुंझार बनकर लड़े करण सिंह खंगारोत का शिलालेख
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जयपुर में नींदड़ बैनाड़ के बारे में कहा जाता है। कि किसी युद्ध में योद्धा का सिर कट कर धड़ से अलग हो गया , फिर भी वह जुंझार बनकर लड़ता रहा था ।
झुंझार बने उसे वीर का मुंड नींदड़ में और धड़ बैनाड़ में गिरा था।
इन दोनों गांवों का नाम नीं - धड़ एवं बे - नाड़ कालांतर में इन गांव का नाम नींदड़ बेनाड़ पड़ गया।
जिस पहाड़ी पर नींदड़ का गढ़ महल बना है, इस पर किले से पूर्व में इस जुझार बनकर लड़े भोमियाजी की आज भी पूजा होती है। जहां पर धड़ बिना मुंड गिरा वह योद्धा नींदड़ के शिव ब्रह्म पोता राजपूत का योद्धा था। इतिहास में लिखा है , कि नींदड़ बेनाड़ के दो राजपूत किसी लड़ाई में गए थे ।
युद्ध में दोनों के माथे (सिर)धड़ से अलग हो गए थे । तब उनके धड़ लेकर बेनाड़ आए और झुंझार भोमिया मानकर पूजा करते थे ।
भोग चढ़ाने के साथ मनौतिया मांगते हैं।
जयपुर के राजाओं और कछवाहों की कुलदेवी मां जमवाय माता के जमवा रामगढ़ स्थित मंदिर में पूजित हो रहे मूर्ति के शिलालेख पर विक्रम संवत 1845 वैशाख सुदी तीन गुरुवार लिखा है।
यह पूजा स्थल रणभूमि में झुंझार बनकर लड़ने वाले वीर योद्धा पृथ्वी सिंह खंगारोत का है ।
इस मूर्ति में एक हाथ में तलवार दूसरे में ढाल है। और उनके कानों में कुंडल है ।आगे लिखा है , कि यह लावा के भूपति पृथ्वी सिंह खंगारोत है जो युद्ध में झुंझार हुए थे। उनके मस्तिष्क पर छत्र तथा मूर्ति के ऊपर एक और सूर्य और चंद्रमा उत्कीर्ण है । पृथ्वी सिंह खंगारोत के बारे में इतिहासकार राघवेंद्र सिंह मनोहर ने लिखा है कि पृथ्वी सिंह काणीखोह के युद्ध में गए थे। उस युद्ध में लड़ाई के दौरान उनके सिर कट गया, तब वह बिना सर के ही लड़े थे।
डिग्गी के ठिकाना रिकॉर्ड में पृथ्वी सिंह ने कंवर पदे में वीरगति को प्राप्त किया था। ऐसा होने का जिक्र है। इतिहास में जिक्र है कि यह जुंझार पृथ्वी सिंह नगर का रक्षक और कोतवाल के रूप में पूजित है। दुष्ट आत्माओं से नगर व गांव के लोगों की रक्षा करते हैं।
इनकी पूजा रविवार और मंगलवार को होती है।यह राजपूत जाति के करण सिंह हैं ।जो जमवाय माता के परम भक्त थे।
इस वजह से बरसों पहले उनकी यह मूर्ति जमवाय माता जमवारामगढ़ में माता के सामने मंदिर में स्थापित की गई थी।
रिपोर्टर *वॉइस ऑफ़ मीडिया* राजस्थान
जितेंद्र शिंभू सिंह शेखावत

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