जय हिन्द क्रान्ति सेवा मिशन: वैचारिक मार्गदर्शिका एवं आह्वान
*जय हिन्द क्रान्ति सेवा मिशन: वैचारिक मार्गदर्शिका एवं आह्वान
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"देश हित सर्वोपरि, मानव सेवा ही परम लक्ष्य"
संगठन के सभी ऊर्जावान पदाधिकारियों और सदस्यों के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश:
1. संगठन के नाम की शक्ति और अर्थ
हमारे संगठन का नाम मात्र शब्द नहीं, बल्कि एक संकल्प है:
जय हिन्द: राष्ट्र के प्रति हमारा नमन और अटूट भक्ति।
क्रान्ति: राष्ट्र के सकारात्मक परिवर्तन हेतु पूर्ण समर्पण।
सेवा: निस्वार्थ भाव से देश और मानवता की सेवा।
मिशन: किसी भी जिम्मेदारी को हाथ में लेकर उसे पूर्ण करने का अदम्य साहस।
2. सदस्य की शक्ति का स्वरूप
मिशन का प्रत्येक सदस्य अंगद के समान दृढ़ निश्चयी और हनुमान जी की भांति बलवान व बुद्धिमान है। संगठन में केवल वही टिक सकता है जो राष्ट्र के प्रति सच्ची निष्ठा रखता हो।
3. राजनीतिक प्रलोभनों से सावधानी
संगठन में जुड़ने के बाद अक्सर विभिन्न राजनीतिक दल आपकी शक्ति को देखकर आकर्षित होंगे। वे आपको लालच देकर केवल एक 'कार्यकर्ता' बनाना चाहेंगे ताकि आप उनके पीछे 'जिंदाबाद' के नारे लगाएं। लेकिन आपको याद रखना है:
राजनीति से ऊपर उठकर निस्वार्थ सेवा पर ध्यान दें।
जब आप संगठन के लिए समर्पित होते हैं, तो आप स्वयं इतने शक्तिशाली बन जाते हैं कि आपको किसी बाहरी सहारे की आवश्यकता नहीं रहती।
4. आत्मनिर्भरता और नेतृत्व
एक समर्पित सदस्य किसी के पीछे नहीं चलता, बल्कि वह खुद एक ऐसा व्यक्तित्व बनता है जो घर बैठे नागरिकों की समस्याओं का समाधान करने में सक्षम होता है। आजाद होकर काम करना ही असली देशभक्ति है।
5. समर्पण ही सफलता की कुंजी
संगठन में बहुत से लोग आते और जाते हैं, लेकिन इतिहास वही रचता है जो:
तन, मन और धन से मिशन के प्रति समर्पित हो।
वैचारिक रूप से मजबूत और अडिग हो।
विशेष संदेश: "रुकता वही है जो खुद मजबूत हो, और चलता वही है जिसके पास साहस हो।"
जय हिन्द क्रान्ति सेवा मिशन राष्ट्रीय संगठन

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