लोकतंत्र का चौथा स्तंभ भी सवालों के घेरे में , राजनीतिक पार्टियों से जुगलबंदी***

 *लोकतंत्र का चौथा स्तंभ भी सवालों के घेरे में , राजनीतिक पार्टियों से जुगलबंदी***



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भारत के संविधान में लोकतंत्र के चार स्तंभ है उनमें से एक पत्रकारिता मीडिया है तीन चार दशक पूर्व  यही लोकतंत्र का चौथा स्तंभ किसी भी राजनीतिक पार्टी संगठन का मनोनीत या निर्वाचित सदस्य नहीं रहा। 

वर्तमान में ठीक इसके विपरीत हो रहा है ।

जो पत्रकारिता संगठन या समाचार पत्र या टीवी चैनल जिसको अब किसी भी पार्टी का राजनीतिक संरक्षण है ।उसकी तो हर जगह बोल बाला व सैंटिग या कोई विशेष नाम  रहता है ।

और जो निष्पक्ष और बिना किसी भेदभाव के पत्रकारिता करते हैं, उनका कोई मूल्य नहीं अर्थात उनकी उपेक्षा की जाती है जो कि लोकतंत्र के लिए खतरा है। 

लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की राजनीतिक पार्टियों से जुगलबंदी ।

अब इस हद तक हो गई है, की राजनीतिक पार्टी का नेता जो कहे वही अब प्रकाशित और प्रिंट मीडिया पर चलती है ।और वायरल की हो जाया करती है। 

हमारा लोकतंत्र भारत का चार स्तंभों पर स्थापित है । ,,,, लोकतंत्र के चारों स्तंभ मजबूत रहते हुए कर्तव्यों और हुए, सच्ची ईमानदारी से अपनी सेवाएं देंगे  तो ही लोकतंत्र कहलाता है,, ,यदि बाकी के तीन स्तंभ कोई गलत निर्णय ले तो उसकी आम जनता तक सूचना लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के द्वारा ही पहुंचाई जाती है। अब यही लोकतंत्र का चौथा स्तंभ निष्पक्ष नहीं होकर पैसों की ओर अग्रसर हो रहा है । और यदि यही हाल रहा तो लोकतंत्र का चौथा स्तंभ सिर्फ और सिर्फ इतिहास और नाम का रहेगा।

यह शाश्वत सत्य है। कि ऊपर वाले वीडियो में राजस्थान पत्रिका नागौर के पदाधिकारी शिवपुरी जिन्होंने बाबा चतुरदास मंदिर सेवा कमेटी एक दूसरे ही नाम से बना ली, जैसा कि आप वीडियो में देखेंगे और  सुनेंगे। और उसमें पदाधिकारी भी बन चुके है।

उनका वर्तमान बुटाटी धाम मंदिर कमेटी अध्यक्ष, देवेंद्र सिंह राठौर से सवाल-जवाब हो रहे हैं। वीडियो को देखने पर सत्यता स्पष्ट नजर आएगी।

लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का इससे बड़ा और वास्तविक प्रमाण और क्या होगा। यह अत्यंत ही गंभीर विषय है। ऐसा समय आ गया है कि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ भी पैसों की तरफ भाग रहा है ।

यह व्यक्तिगत राजनीति से प्रेरित, रंजिश के कारण एक दिव्य ,अद्भुत और वास्तविक धार्मिक धाम को सुर्खियों में लाना व उसकी छवि को धूमिल करने का प्रयास भी है । और अपनी टीआरपी बनाना है।

जैसा कि पूर्व में हमारे माननीय प्रधानमंत्री महोदय कह चुके हैं , कि दिखास और  छपास का युग आरंभ हो चुका है ।

रिपोर्टर *वॉइस ऑफ़ मीडिया* राजस्थान 

संगठन कार्यकारिणी , सदस्य

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