ओंकारेश्वर धाम में नानी बाई रो मायरो कथा का भावविभोर समापन भक्ति, लोकसंस्कृति और भावनाओं का अद्भुत संगम, श्रद्धालु झूमे
ओंकारेश्वर धाम में नानी बाई रो मायरो कथा का भावविभोर समापन
भक्ति, लोकसंस्कृति और भावनाओं का अद्भुत संगम,
श्रद्धालु झूमे
तीन दिवसीय आयोजन में मेले सा माहौल
रिश्तों की मर्यादा का संदेश
चौमू। ग्राम पंचायत डोलाकाबास, मंडा रीको गेट के समीप स्थित ओंकारेश्वर धाम शिव मंदिर में आयोजित तीन दिवसीय नानी बाई रो मायरो कथा का रविवार को भव्य, भावपूर्ण और भक्तिमय वातावरण में समापन हुआ। अंतिम दिन श्रद्धा, भक्ति और लोकसंस्कृति का ऐसा अनुपम दृश्य देखने को मिला कि पूरा पांडाल भक्तिरस से सराबोर हो गया। पांडाल को आकर्षक साज-सज्जा से सजाया गया था। लाल-पीले पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं की बड़ी भागीदारी, ढोल-नगाड़ों व लोकवाद्यों की गूंज तथा श्रद्धालुओं की निरंतर आवाजाही ने आयोजन को लोकपर्व जैसा स्वरूप प्रदान कर दिया। महिलाओं के समूह भजन-कीर्तन में लीन नजर आए, वहीं भक्त ढोल की थाप पर झूमते दिखाई दिए। कथा स्थल के आसपास ग्रामीण मेले जैसा दृश्य बना रहा।
कार्यक्रम संयोजक कैलाश पारीक ने बताया कि कथा के अंतिम दिन दूर-दराज के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मंच पर कथावाचक गोवत्स राधाकृष्णन महाराज का साफा, माला व दुपट्टा पहनाकर पारंपरिक तरीके से भव्य सम्मान किया गया। इस अवसर पर धार्मिक व सामाजिक प्रतिनिधि, आयोजन समिति के सदस्य तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कथावाचक ने ओजस्वी प्रवचनों में पारिवारिक रिश्तों की मर्यादा और सामाजिक मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ननद-भाभी जैसे पवित्र संबंध स्नेह, विश्वास और समझदारी से निभाए जाते हैं। उन्होंने आधुनिक दौर में रिश्तों के विकृत चित्रण से समाज को बचाने का आह्वान किया। कथा के दौरान नरसी-भगवान संवाद, मायरो में सहायता न मिलने का प्रसंग और नानी बाई की पीड़ा की मार्मिक प्रस्तुति ने श्रोताओं को भावुक कर दिया। कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।
समापन अवसर पर महाआरती, सामूहिक भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण के साथ कथा का विधिवत समापन हुआ। आयोजन में महिलाओं, युवाओं और क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों की उल्लेखनीय भागीदारी रही।
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कथा के प्रमुख भाव
नानी बाई की पीड़ा की मार्मिक प्रस्तुति
नरसी-भगवान संवाद ने श्रोताओं को भावुक किया
रिश्तों की मर्यादा और सामाजिक मूल्यों का सशक्त संदेश
भक्तिरस में डूबा विशाल पांडाल
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आयोजन की प्रमुख झलकियां
तीन दिवसीय भव्य धार्मिक आयोजन
लाल पारंपरिक वेश में महिलाओं की बड़ी भागीदारी
ढोल-नगाड़ों व लोकवाद्यों की गूंज
अंतिम दिन मेले जैसा वातावरण
मंच पर कथावाचक का सम्मान समारोह
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संदेश
“रिश्तों की पवित्रता,
भक्ति की शक्ति और
लोकसंस्कृति की परंपरा—
यही नानी बाई रो मायरो का सार है।”
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उपस्थित रहे:
पूर्व गोविंदगढ़ प्रधान महेश मीणा, चौमू थाना प्रभारी प्रदीप शर्मा, पंचायत समिति सदस्य प्रतिनिधि जगदीश करीरी, सरपंच सुल्तान बुनकर, पूर्व बैंक मैनेजर मालीराम यादव, वरिष्ठ पत्रकार भगवान सहाय यादव, रामकिशोर मेला सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु।

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